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अभिषेक बनर्जी ने बदला चुनावी नैरेटिव

भाजपा के 'रिमोट कंट्रोल' बनाम तृणमूल के 'रिपोर्ट कार्ड' की लड़ाई

07 Apr 2026

अभिषेक बनर्जी ने बदला चुनावी नैरेटिव

कोलकाता। विधानसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है और इस बार तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने चुनावी विमर्श को पूरी तरह से बदल दिया है। अभिषेक ने आगामी चुनाव को दो आरसी के बीच का महामुकाबला करार दिया है। 
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट के जरिए उन्होंने एक तरफ भाजपा के रिमोट कंट्रोल और दूसरी तरफ तृणमूल के रिपोर्ट कार्ड को रखकर जनता के सामने सीधा विकल्प पेश कर दिया है। अभिषेक बनर्जी का यह रिमोट कंट्रोल वाला हमला सीधे तौर पर केंद्र सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना है। उनके अनुसार, दिल्ली में बैठा रिमोट कंट्रोल बंगाल के हक का पैसा रोकता है और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राज्य के विकास में रोड़े अटकाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इसी रिमोट कंट्रोल के जरिए बंगाल की संस्कृति, भाषा और अस्मिता पर चोट करने की कोशिश कर रही है। अभिषेक ने विशेष रूप से मतदाता सूची से हटाए गए 27 लाख नामों का मुद्दा उठाते हुए इसे भी इसी रिमोट कंट्रोल की साजिश का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, वैध मतदाताओं को प्रक्रिया के नाम पर बाहर करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। 
दूसरी ओर, अभिषेक ने अपनी पार्टी की ताकत के रूप में रिपोर्ट कार्ड को पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में ममता बनर्जी के नेतृत्व में जो विकास हुआ है, वह बंगाल की अपनी मेहनत और ईमानदारी का परिणाम है। इस रिपोर्ट कार्ड में कन्याश्री, लक्ष्मी भंडार जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रमुखता से रखा गया है। अभिषेक का तर्क है कि तृणमूल का रिपोर्ट कार्ड जनता के प्रति उनकी जवाबदेही और किए गए वादों को पूरा करने का सबूत है, जबकि भाजपा केवल बाहरी नियंत्रण और विभाजनकारी राजनीति के सहारे चुनाव जीतना चाहती है। 
हाल ही में जलंगी, डोमकल, हरीशचंद्रपुर और सिलीगुड़ी जैसी जगहों पर हुई जनसभाओं और रोड शो में उमड़ी भीड़ का जिक्र करते हुए अभिषेक ने आत्मविश्वास जताया कि बंगाल की जनता रिमोट कंट्रोल वाली राजनीति को नकार कर विकास के रिपोर्ट कार्ड पर मुहर लगाएगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 2026 की यह लड़ाई केवल सत्ता की नहीं, बल्कि बंगाल के स्वाभिमान और दिल्ली के हस्तक्षेप के बीच का संघर्ष है। अब देखना यह होगा कि दो त्रष्ट का यह नैरेटिव मतदाताओं के दिलों में कितनी जगह बना पाता है और भाजपा इस रिमोट कंट्रोल वाले ठप्पे से खुद को कैसे बचाती है। 

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